वर्षीतप (संवत्सर तप)

प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव परमात्मा को दीक्षा अंगीकार करने के बाद लाभांतराय कर्म का उदय होने से 400 दिन तक उन्हें निर्दोष भिक्षा की प्राप्ति...

देवगति के दुःख

आज के इस युग में अधिकांश लोग यह मानते हैं कि देव गति में सुख ही सुख होते हैं और अधिकांश लोग देव गति...

धार्मिक पाठशाला एवं संस्कार शाला की अनिवार्यता

जय जिनेन्द्र, आज के इस भौतिक युग में धर्म के संस्कारों का लोप होता जा रहा है। भौतिक पढ़ाई हेतु कई विद्यालय मौजूद हैं,...

सधार्मिक भक्ति के संबंध में

जैन जीवन शैली के तत्वों में समाया एक तत्व है साधर्मिक भक्ति । एक सुश्रावक का कर्तव्य होता है सधार्मिक भक्ति करना पर किस...

जैन मंत्र साधना – Power Of Mantra

जैन धर्म में मंत्र साधना व जाप का बहुत प्रबाव बताया गया है। मंत्र साधना कर विविध सिद्धि प्राप्त महाभगवंत आज भी यहाँ मौजूद...

रात्रिभोजन के संबंध में

रात्रिभोजन का त्याग मोक्षमार्ग के पथिक के लिए तो आवश्यक है ही, परंतु उसके आधुनिक विज्ञान – अनुसार भी अनेक लाभ हैं। जैसे कि...

इन पापो से सभी जैनों को बचाना चाहिए।

जिस प्रवृति से दुर्गति में पड़ते जीवों को अहिंसा द्वारा बचायें उसे धर्म कहा जाता है। क्या आप जानते है आप अनजाने में भी...

पाँच प्रकार के ज्ञानो का वर्णन व दोहे

जैन धर्म के अनुसार ज्ञान आत्मा का गुण है । आत्मा ज्ञानमय है, ज्ञानस्वरुप है । ज्ञान एवं ज्ञानी भिन्न भी माने गये हैं,...

जैन साधूभगवंत के पांच महाव्रत

प्राणातिपातविरमाण महाव्रत – अहिंसा मृषावादविरमाण महाव्रत – सत्य अदत्तादानविरमाण महाव्रत – अचौर्य मैथुनविरमाण महाव्रत – ब्रह्मचर्य परिग्रहविरमाण महाव्रत – अपरिग्रह   दीक्षा लेनेवाला व्यक्ति प्रतिज्ञापूर्वक कहता है की - "है...

जैन तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले जरुर पढ़े

एक वह जमाना था, अब पैदल ही तीर्थ यात्रा करने की परिपाटी थी, अथवा तो बैलगाडी द्वारा यात्रा की जाती थी । आज भी...

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